Monday, January 24, 2022

अखिल गोगोई के ‘लेटर बम’ से घबराई बीजेपी, कहीं उल्टा ना पड़ जाए खेल

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RTI एक्टिविस्ट अखिल गोगोई ने नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के खिलाफ गंभीर आरोप लगाया है. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन संबंधी मामलों में एक साल से जेल में बंद अखिल गोगोई का आरोप है कि एनआईए आरएसएस और बीजेपी के भर्ती कार्यालय की तरह काम कर रहा है.

गिरफ्तारी से पहले अखिल गोगोई कृषक मुक्ति संग्राम समिति नाम का एक संगठन चलाते थे. लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने एक पार्टी बना ली और चुनाव में कूद पड़े. गोगोई की पार्टी राइजोर दल ने असम जातीय दल के साथ गठबंधन करके बीजेपी और कांग्रेस दोनों के खिलाफ ताल ठोकी है.

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असम गोगोई ने 23 मार्च को एक चिट्ठी असम की जनता के नाम लिखी है. ये चिट्ठी एनआईए, बीजेपी और आरएसएस का फसाना बन गई है. अखिल गोगोई अपनी चिट्ठी में लिखा है कि हिरासत में उन्हें मानसिक एवं शारीरिक यातनाएं दी गईं. उन्होंने आरोप लगाया है कि एनआईए अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने पर उन्हें तत्काल जमानत दी जा सकती है.

इस चिट्ठी ने असम की राजनीति में भूचाल ला दिया है. क्योंकि असम के चुनाव में सीएए और एनआरसी बीजेपी के गले की फांस बना हुआ है. बीजेपी के नेता घूम-घूमकर सीएए और एनआरसी पर सफाई दे रहे हैं. ये चिट्ठी इस लिए भी अहम हो जाती है क्योंकि गोगोई को एंटी सीएए के दौरान ही गिरफ्तार किया गया था. गोगोई असम में सीएए के विरोध का चेहरा हैं.

चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि अदालत की अनुमति के बिना 18 दिसंबर, 2019 को अखिल गोगोई को दिल्ली ले जाया गया था. उन्होंने लिखा, ‘मुझे एनआईए मुख्यालय में लॉकअप संख्या एक में रखा गया था और केवल एक गंदा कंबल दिया गया था. मैं तीन-चार डिग्री सेल्सियस तापमान में जमीन पर सोया.’

गोगोई ने आरोप लगाया कि एनआईए अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान उन्हें आरएसएस में शामिल होने पर तत्काल जमानत दिए जाने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा, ‘मैं जब इस अपमानजनक प्रस्ताव के खिलाफ दलील दे रहा था, तो उन्होंने भाजपा में शामिल होने का एक और प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि मैं किसी रिक्त सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकता हूं और मंत्री बन सकता हूं.’

आरटीआई कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें केएमएसएस छोड़कर असम के लोगों का धर्मांतरण करके उन्हें ईसाई बनाए जाने के खिलाफ काम करने पर एक एनजीओ शुरू करने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रस्ताव दिया गया था.

कोई नहीं जानता कि अखिल गोगोई सच कह रहे हैं या झूठ लेकिन क्या इन आरोपों की जांच नहीं होनी चाहिए. क्या इस बात की जांच नहीं होनी चाहिए कि एनआईए RSS और BJP की टीम की तरह काम कर रही है या नहीं

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