रूस के खिलाफ अमेरिका के इस फैसले का भारत पर पड़ेगा गहरा असर

यूक्रेन पर रूस के हमले से अमेरिका समेत दुनिया के कई देश पुतिन से काफी नाराज है. रूस और अमेरिका के रिश्ते में तो नई खटास आ गई है. अमेरिका ने भले ही यूक्रेन को सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया है, लेकिन जो बाइडेन प्रशासन ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं. इनमें कुछ प्रतिबंध ऐसे हैं जो रूस के स्पेस प्रोग्राम को कमजोर कर देंगे.

वहाइट हाउस के अनुसार रूस के स्पेस प्रोग्राम पर सीधे तौर पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. लेकिन कुछ बेहद संवेदनशील तकनीकों को रूस एक्सपोर्ट करने से रोक दिया गया है. इन तकनीकों का उपयोग स्पेस इंडस्ट्री में किया जाता है. अमेरिका ने रूस के खिलाफ सेमीकंडक्टर्स, टेलिकम्यूनिकेशन, एनक्रिप्शन सिक्योरिटी, लेजर्स, सेंसर्स, नेविगेशन, एवियोनिक्स और मैरीटाइम तकनीकों के निर्यात पर बैन लगा दिया है.

अमेरिका के इस फैसले पर रूस कड़ी आपत्ति जताई है. रूस की स्पेस एजेंसी Roscosmos के डायरेक्टर डिमित्री रोगोजिन ने कई ट्वीट करके अमेरिका से कहा कि यदि आप ISS पर हमारा सहयोग बंद करेंगे तो फिर स्पेस स्टेशन को अनियंत्रित होने और अमेरिका या यूरोप पर कहीं गिरने से कौन बचाएगा. ये भी आशंका है कि ये 500 टन का ढांचा भारत या चीन पर गिर जाए. क्या आप उनको इस तरह से डराना चाहते हैं?

डिमित्री रोगोजिन के ट्वीट के बाद नासा ने कहा कि ऑर्बिटल मिशन और ग्राउंड स्टेशन ऑपरेशंस पर हम रूस के साथ ही मिलकर काम कर रहे हैं. उसमें किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. नासा और रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) एकसाथ मिलकर भविष्य के स्पेस मिशन करते रहेंगे.

इससे पहले भी अमेरिका और रूस में स्पेस स्टेशन को लेकर ठन चुकी है. पिछली साल रूस ने 14 नवंबर की रात या 15 नवंबर की सुबह एंटी-सैटेलाइट मिसाइल (ASAT) दागकर अपने सैटेलाइट कॉसमॉस-1408 (Cosmos-1408) को उड़ा दिया. इस सैटेलाइट का वजन 2000 किलोग्राम था.

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