‘रूस के मुकुट’ पर पुतिन का हमला

USSR का विघटन रूसी गणराज्य के इतिहास का वो अध्याय है जिसे पुतिन पलट देना चाहते हैं और ये बात किसी से छिपी नहीं है. पुतिन की तरह रूस का हर नागरिक भी यही चाहता है. यूक्रेन के क्षेत्रों लुहान्सक और दोनेत्स्क को स्वतंत्र देश की मान्यता देने और यूक्रेन पर हमला करके रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने USSR के सपने को फिर से खाद-पान दे दिया है.

1991 में सोवियत संघ के बिखरने के बाद बने यूक्रेन को शुरू से ही रूस अपने पाले में करने की कोशिशें करता आया है. हालांकि, यूक्रेन रूसी प्रभुत्व से खुद को बचाए रखने के लिए पश्चिमी देशों की ओर झुका रहा. लेकिन पुतिन अब ज्यादा इंतजार करने के मूड में नहीं हैं. पुतिन जो कर रहे हैं इसका अंदेशा बहुत पहले से था. साल 2000 में सत्ता में आने के बाद से पुतिन ये स्पष्ट कर चुके हैं कि वह सालों तक अमेरिका और उसके नेटो सहयोगियों द्वारा कथित अपमान के बाद रूस को एक बार विश्व शक्ति बनाने के प्रति दृढ़ संकल्प हैं. और उसी कोशिश में वो दिन-रात लगे हुए हैं. कुल मिलाकर पुतिन धीरे-धीरे रूस के विस्तार करने की अपनी रणनीति में आगे बढ़ते और कुछ हद तक कामयाब होते भी दिख रहे हैं.

पुतिन की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए यूक्रेन सबसे महत्वपूर्ण है. 2015 में अपने एक भाषण में पुतिन ने यूक्रेन को ‘रूस का मुकुट’ कहा था. कूटनीतिक हलकों में अक्सर ये कहा जाता है कि आखिर पुतिन यूक्रेन को लेकर इतने जुनूनी (obsessed) क्यों हैं? 1991 में जब USSR का विखंडन हुआ तो रूस इसका सबसे ताकतवर गणराज्य था, लेकिन दूसरे ही नंबर पर यूक्रेन था. 44 मिलियन की आबादी वाले इस देश की जीडीपी 155.6 बिलियन डॉलर है. आज यूक्रेन दो हिस्सा में बंटा दिखता है. पूरब और पश्चिम. पूरब के लोग अपने आप को रूस के करीबी समझते हैं जबकि पश्चिम के लोग खुद को यूरोप से नजदीक मानते स देश में इसी प्रभुत्व की लड़ाई है. यूक्रेन का पूर्वी हिस्सा रूस से सटा है और यहां लोग रसियन बोलते हैं जबिक पश्चिम में ठीक इसके विपरित है. यहां लोगों भावनाओं में रूसी नेतृत्व खलनायक है.

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