आखिर क्यों पुतिन से डरते हैं NATO और अमेरिका?

रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है. रूस के इस कदम का कुछ देशों को छोड़कर हर कोई विरोध कर रहा है. अमेरिका, नाटो और यूरोपियन यूनियन तो खुलकर रूस की आलोचना कर रहे हैं. रूस को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी देश ने रूस के खिलाफ सन्य अभियान नहीं छेड़ा है. अमेरिका, नाटो और यूरोपियन यूनियन यूक्रेन की मदद करने की बात तो कर रहे हैं लेकिन रूस से लड़ना नहीं चाह रहे हैं. इसकी वजह है रूस की सैन्य ताकत और परमाणु हथियार.

रूस के पास परमाणु हथियारों का जखीरा है. फ़ेडरेशन ऑफ़ अमेरिकन साइंटिस्ट्स नामक संस्था के मुताबिक रूस के पास दुनिया भर में 5,977 परमाणु हथियार हैं. इनमें से 1,500 एक्सपायर होने वाले हैं या पुराने हो जाने के कारण जल्द ही उन्हें तबाह कर दिया जाएगा.

बाक़ी के 4,500 हथियारों को स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर वेपन (रणनीतिक परमाणु हथियार) माना जाता है. इनमें बैलिस्टिक मिसाइलें और रॉकेट्स शामिल हैं जो लंबी दूरी तक मार कर सकते हैं. यही हथियार हैं जिन्हें परमाणु युद्ध के साथ जोड़कर देखा जाता है.

दुनिया में अब तक दो बार परमाणु बमों से हमला किया गया है जिनसे भयंकर नुक़सान हुआ. आज से 77 साल पहले ये दोनों हमले अमेरिका ने जापान पर किए थे. अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे. ऐसा माना जाता है कि हिरोशिमा में 80,000 और नागासाकी में 70,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

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