अब्दुल हबीब युसूफ मार्फानी जिन्हें नेता जी ने दिया था सेवक ए हिन्द का ख़िताब, जानिए क्यों?

आज महान स्वतंत्रता सेनानी नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। नेता जी की ज़िंदगी में मुसलमानों का अहम किरदार रहा है। नेता जी पर एक समय ऐसा भी आया जब वे अंग्रेज़ों की क़ैद से फरार होने के लिये भेष बदलकर मोहम्मद ज़ियाउद्दीन बने थे। बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, नेता जी की आज़ाद हिंद फौज का मशहूर नारा ‘जय हिंद’ देने वाले भी आबिद हसन सफ़रानी एक मुसलमान ही थे। ऐसे ही एक और शख्स का नाम इस कड़ी में जुड़ता है, जिसकी चर्चा बहुत कम हुई है, या यूं समझ लीजिये न के बराबर ही हुई है। यह नाम मेमन अब्दुल हबीब युसूफ मार्फानी का है।

सौराष्ट्र के धोराजी शहर के रहने वाले युसूफ मार्फानी अंग्रेजों के समय के बहुत बड़े व्यापारी थे। जब देश की आज़ादी की लडाई लड़ी जा रही थी तब मेमन अब्दुल युसूफ हुसैन मार्फानी का परिवार रंगून में था आज़ाद हिन्द फौज को आर्थिक रूप से मदद करने वाले मेमन अब्दुल हबीब युसूफ मार्फानी पहले व्यक्ति थे। मेमन अब्दुल युसूफ हुसैन मार्फानी ने अपनी सारी जायदाद,पैसा जिसकी कीमत उस ज़माने में एक करोड़ रूपए की थी उसे ‘आजाद हिन्द बैंक’ में दे दी थी।

तब कहलाए सेवक ए हिन्द

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने मेमन अब्दुल हबीब युसूफ मार्फानी का धन्यवाद देते हुए उनको सेवक-ए-हिन्द का खिताब दिया था इतिहासकार राज मल कासलीवाल अपनी किताब ‘नेताजी आजाद हिन्द फौज एंड आफ्टर’ में बताया है की नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने उनके इस दान पर कहा था की ‘हबीब सेठ ने आजाद हिन्द फौज की मदद की है उनक यह योगदान हमेशा याद रखा जायेगा।’ इतना ही नहीं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज’ में 40% मुसलमान थे आज़ाद हिन्द फौज में जिस शख्स को सेना में भर्ती करने का काम सौंपा गया था उनका नाम गुलाम हुसैन मुश्ताक रंदेरी था ,वे गुजरात के सूरत के रहने वाले थे।

आजाद हिन्द फौज में बहुत सारे मुसलमान थे जो बड़े अफसर और सिपाही के पद पर थे, उनमें से कुछ प्रमुख नाम यहां दिये जा रहे हैं।जनरल शाहनवाज़ खान, कर्नल अज़ीज़ अहमद, अशरफउद्दीन चौधरी, कर्नल हबीबुर्रहमान, अब्दुल रहमान खान, अशरफ मंडल, आमिर हयात, अख्तर अली, अहमद खान, ए.के. मिर्ज़ा, अबू खान, एस अख्तर अली, अहमदुल्लाह, ताजुद्दीन और हैदराबाद के आबिद हसन सफ़रानी थे. जिन्होंने ही सबसे पहले ‘जय हिन्द’का नारा दिया था और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सबसे पहले नेताजी कहकर संबोधित किया था।