चंद्रशेखर के ‘आज़ाद’ बोल ‘मायावती ने ब्राह्मणों को सौंपा बहुजनों का नेतृत्व, दलित उनके लिए सिर्फ वोटर’

नई दिल्लीः आज़ाद समाज पार्टी के सुप्रीमो चंद्रशेखर आज़ाद ने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर सवालों की बोछार की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बसपा सुप्रीमो पर आरोप लगाते हुए कहा कि मायावती ने नेतृत्व ब्राहम्णों को सौंप दिया है। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में चंद्रशेखर ने कहा कि मेरा सवाल है, बहनजी जिनसे वोट मांगती हैं, जिन्हें अपना मानती हैं, उन पर अत्याचार के वक्त चुप क्यों रहती हैं? आंदोलन क्यों नहीं करतीं? उन्होंने (मायावती ने) तो कहा था- वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा। इसके विपरीत लोकसभा में रितेश पांडेय और राज्यसभा में सतीश मिश्रा बसपा के नेता हैं। इसमें दलितों का नेतृत्व कहां है?

लगातार मुखर रहे हैं चंद्रशेखर

चंद्रशेखर ने पिछले दिनों एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में भी मायावती पर निशाना साधा था। उन्होंने चैनल से बात करते हुए सवाल दाग़ा था कि दलितों की बात करने वाली मायावती सिर्फ चुनाव के दौरान ही मुद्दे उठाती क्यों नज़र आती हैं? हाल ही में संपन्न हुए यूपी के त्रस्तरीय पंचायत चुनाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूपी का कोई ऐसा जिला नहीं है, जहां हम नहीं जीते हैं। जहां नहीं जीत पाए, वहां दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे।

जानकारी के लिये बता दें कि आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष ने हाल ही में यूपी में साइकिल यात्रा निकालने का फैसला लिया है। भास्कर को दिए साक्षात्कार में भी उन्होंने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि हम संसाधन विहीन जरूर हैं, लेकिन वही हौसला रखते हैं। बाइक, साइकिल से गांव-गांव जाकर लोगों को जगा रहे हैं। हमने तो कांग्रेस उम्मीदवारों की जमानतें जब्त होने का समय भी देखा। भाजपा और जनसंघ की दो-दो सीटें आती थीं और आज पूर्ण बहुमत की सरकारें हैं।

जानकारी के लिये बता दें कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने सामाजिक आंदोलन चलाने के बाद 15 मार्च 2020 को आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) का गठन किया था। उससे पहले वे देश भर में घूमकर दलितों के बीच सामाजिक आंदोलन चला रहे थे। 2017 में सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा में चंद्रशेखर का उभार हुआ था, इस हिंसा के आरोप में उन्होंने 16 महीने जेल में बिताए थे। जेल से आने के बाद उन्होंने भीम आर्मी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और विवादित नागरिकता क़ानून के विरोध में वे एक मुखर आवाज़ बने, चंद्रशेखर नागरिकता क़ानून के विरोध में आंदोलन करने के लिये जेल भी रहकर आए थे।