धर्मांतरण: सत्ता में बने रहने के लिये ज़रूरी हैं ऐसे मुद्दे, ताकि जनता का ध्यान भटका रहे!

विक्रम सिंह चौहान

जब किसी मुस्लिम को आतंक के आरोप में,धर्मान्तरण के आरोप में पुलिस गिरफ्तार करें और पलभर में टीवी न्यूज,वेबसाइट में यही न्यूज़ दिखने लगे तो शक होना लाजमी है। देश में जो हालात इन दिनों है उसमें से उबरने का आसान सा रास्ता इन लोगों के पास यही बचा है कि सब इल्जाम मुस्लिमों के सिर पर रख दो। तो कुछ दिन बहुसंख्यक आबादी शांत रहती है और मुस्लिमों से घृणा करते हुए पेट की भूख भी भूल जाती है। बड़े मूंछ वाले यूपी  के एडीजी (लॉ एंड आर्डर) प्रशांत कुमार को तो लगता है इस पद में बैठने के बाद यही टास्क दे दिया गया है कि मुस्लिमों का कभी पीएफआई से,कभी आईएसआई से लिंक पता करते रहो और मीडिया में इसे जोरशोर से उछालो। इनकी ताजा स्क्रिप्ट है दो मौलानाओं को लेकर। उमर गौतम और जहांगीर नामक इन मौलानाओं पर आरोप है कि इन्होंने अब तक 1000 हिंदुओं का धर्मान्तरण किया है। पूरे 1000! न 999 न 1001! यूपी एटीएस ने धर्मान्तरण के लिए आईएसआई और विदेशी फंडिंग होने का शक भी जताया है। कितना घिसापिटा स्क्रिप्ट है। विदेशी फंडिंग एक रुपया भारत सरकार के जानकारी के बिना किसी को नहीं हो सकता है।

सभी केस में आईएसआई का लिंक बताते हैं, ताकि अखबारों में बड़ा सा छपे, पर अदालत में सबूत नहीं दे पाते। इनके पास से ब्लेड और अन्य संदिग्ध चीजें बरामद की गई है,बताइये ब्लेड कब से संदिग्ध हो गया,कोई नाखून काटने के लिए ब्लेड भी नहीं रख सकता। आरोप है कि धर्म परिवर्तन के लिए IDC (Islamic Dawah Centre) नाम की संस्था भी बनाई है, गलत बात संस्था धर्म परिवर्तन के लिए नहीं, धर्म की अच्छी बातों के प्रसार के लिए बनाई गई है। हिंदुओं के ऐसे सैकडों संस्थाएं है। आरोप है कि ये दोनों भय और प्रलोभन से धर्मांतरण कराते थे। क्या दोनों लोगों के सिर पर बंदूक रखते थे कि मुस्लिम बन जाओ और 1000 लोग जब भय से धर्म परिवर्तन कर लिए तो क्या किसी को हिम्मत नहीं हुई कि पुलिस को शिकायत कर दें कि उनका धर्म बदलने के लिए डराया जा रहा है।

आरोप है कि मोटिवेशनल थॉट के जरिए हिंदुओं का धर्मांतरण करते थे। ये कबसे इस देश में अपराध हो गया? कुलमिलाकर इन दो मुस्लिमों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। हो सकता है इन मौलानाओं ने कुछ ऐसे लोगों की मदद की होगी जो स्वेच्छा से धर्म बदलना चाहते हैं। आरोपी उमर गौतम उच्च शिक्षित और बुद्धिजीवी व्यक्ति हैं। अब यूपी सरकार इन पर यूएपीए भी लगा सकती है। ये महीनों या यूं कहें कई साल जेल में सड़ेंगे। न इन्हें वकील मिलेंगे, न ये अपने घरवालों से मिल सकेंगे, न जमानत याचिका इनकी तुरंत लगेगी। जज साहब भी इनकी नहीं सुनेंगे अभी,भले पुलिस के पास सबूत के नाम पर सिर्फ एक ब्लेड होगा।

साल दो साल बाद किसी एक ईमानदार जज के पास इनका केस जाएगा, और ये बाइज्जत बरी होंगे। तब इनकी बेगुनाही और बरी होने की खबर एक कॉलम में भी नहीं होगी। आने वाले दिन मुस्लिमों के लिए और भी बुरे होंगे, सत्ता में आने का इनके पास यही एक रास्ता है बहुसंख्यक हिंदुओं के मन में मुसलमानों के लिए नफरत और असुरक्षा की भावना भर दो। धीरे-धीरे नशे की तरह इस तरह की खबरों को परोसकर हिंदुओं को मजबूर कर दो कि वे वोट बीजेपी को ही दें। बाकी जो सरकार भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं के लैपटॉप में मालवेयर का इस्तेमाल करते हुए इजरायल से “भड़काऊ” सुबूत डाल सकती है। वो इन मुस्लिमों के घर,बैग,मोबाइल में क्या कुछ नहीं डाल सकती है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार एंव सोशल एक्टिविस्ट हैं, ये उनके निजी विचार हैं)