सरकार ने नहीं दी दूसरी किश्त, अल्पसंख्यक इलाक़ों में बनने वाले शिक्षण संस्थान बीच में ही अटके

मुजफ्फरनगरः वर्ष 2006 में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई PM  जन विकास योजना अब ध्डाम हो चुकी है। तत्कालीन प्रधनमंत्रा मनमोहन सिंह द्वारा पीएम जन विकास योजना के अन्तर्गत अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रो में अल्पसंख्यक समाज के लोगों के लिए चिकित्सा एवं शिक्षा के साथ इन्हें रोजी रोटी से जोडने के लिए ग्रामीण क्षेत्रो में राजकीय इंटर कॉलिज, डिग्री कॉलिज, आंगनबाडी केन्द्र, कौशल विकास के लिए आईटीआई व अन्य निर्माण को धनराशि निर्गत की गई थी। साढे तीन करोड़ की लागत से राजकीय इंटर कॉलिज बनने थे। 50 प्रतिशत धनराशि तत्काल दे दी गई थी। लेकिन सरकार बदली तो ये सब योजनाएं पिछली सरकार के साथ ही फाईलो में  रखी रह गई। चार साल पूर्व तक यह कार्य चला, लेकिन चार साल से निर्माण कार्य बंद है। सारे निर्माण अधूरे पडे है। जिसका कोई पुरसाहाल लेने के लिए तैयार नहीं है।

वर्ष 2006 में देश के मुसलमानो की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक पिछडेपन की तस्वीर जस्टिस राजेन्द्र सच्चर के नेतृत्व में गठित कमेटी ने देश के सामने पेश की थी। इस कमेटी की  रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में मुसलमानो की हालत दलितो से भी बदतर हैं। इस कमेटी में एएमयू के पूर्व कुलपति  सय्यद हामिद व सामाजिक कार्यकर्ता जफर महमूद भी शामिल थे। 430 पेज की यह रिपोर्ट वर्ष 2006 में लोकसभा में पेश की गई थी। स्वतंत्र भारत में ये पहला मौका था जब किसी सरकारी कमेटी द्वारा धर्म के आधार पर कोई रिपोर्ट पेश की गई हो। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि मुस्लिमों की भागेदारी अफसरो में तीन से चार प्रतिशत है। पुलिस बल में सात तो रेलवे में साढे चार प्रतिशत कर्मचारी है। उनकी इस  कमेटी की सिफारिश रोजगार, लोन, कौशल विकास व शिक्षा था। जिसके चलते देश भर में यह योजना शुरू की गई। अगर सहारनपुर मंडल पर ही निगाह दौडाई जाये तो यहां अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाको में चल रहे कार्य बंद हो चुके है।

पीएम मोदी के दावे की हक़ीक़त

हालांकि देश के PM नरेन्द्र मोदी अपने बयान में यह कहते नजर आते है कि उनकी मंशा यह है कि मुसलमान के एक हाथ में कम्प्यूटर और दूसरे में कुरआन हो। लेकिन यहां केन्द्र सरकार की मंशा पर इन योजनाओं का बंद होना सवाल खडा कर रहा हैं। शाहपुर ब्लाक के कसेरवा की यह तस्वीर बता रही है कि पिछले कई साल से यह कार्य अधूरा पडा है। इसका निर्माण कार्य राजकीय निर्माण एजेंसी सीएनडीएस को दिया गया था। लेकिन सीएनडीएस को दूसरी किश्त नहीं मिल पाई। ऐसे में कार्य रूक गया। मीरापुर क्षेत्र के ग्राम कुतुबपुर, बिलासपुर, शामली के मसावी, हरड , पुरकाजी, मेरठ के फफूंडा, ग्राम जडौदा, कैराना के पलठेडी, शामली के भूरा आदि गांवो में राजकीय इंटर कॉलिज बनने थे, लेकिन साढे तीन करोड मे से मात्र 50 प्रतिशत किश्त ही रिलीज हो पाई। जिसके बाद यह कार्य जस का तस पड़ा है। बुढ़ाना क्षेत्र में दो डिग्री कॉलिज  प्रस्तावित थे। यह भी सरकार बदलने के साथ ही वहीं रूक गये।  जनपद के अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रो में 34 आंगनबाडी सेंटरो का निर्माण होना था ताकि अल्पसंख्यक समाज के बच्चो को कुपोषण से बचाया जा सके, यह भी वहीं रूक गया।

सरकार की योजना थी कि जिस क्षेत्र में अल्पसंख्यको की आबादी चालीस प्रतिशत से ज्यादा है, वहीं पर यह कार्य हो। कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन आज यह सब निर्माण कार्य सपफेद हाथी बनकर रह गये हैं। अब इंतजार है, कब केन्द्र सरकार इन्हें पूरा करने के लिए पैसा रिलीज करेगी और कब यहां बच्चो को शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिलेगा।

क्या कहते हैं अफसर और नेता

एक्सईएन, सी.एन.डी.एस. ;कार्यदायी संस्था मेरठ मुकेश शर्मा कहते हैं कि ‘‘प्रधानमंत्री जन विकास योजना के अन्तर्गत जो पैसा सीएनडीएस को निर्माण कार्य के लिए दिया गया था। उसका पूरा प्रयोग करके उपभोग प्रमाण पत्र सरकार को दे दिया गया है। इस योजना के अन्तर्गत जो कार्य अधूरे रह गये है। उसके लिए सरकार से धनराशि मांगी गई है। जैसी कि दूसरी किश्त आयेगी, तत्काल ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जायेगा।’’

अल्पसंख्यक समुदाय से संबंध रखने वाले सपा नेता गौरव जैन कहते हैं कि  ‘‘अल्पसंख्यको को शिक्षा की डगर से दूर करने की यह साजिश है, सरकार एक तरपफ कहती है कि वह र्ध्म के आधर पर कोई भेदभाव नहीं करती, दूसरी तरफ अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रो के शिक्षण संस्थाओं के निर्माण की धनराशि न रिलीज करना सरकार की मंशा को जता रहा है, यदि सरकार वास्तव में पूरे देश के नागरिको को एक समाज समझती है तो  सभी को शिक्षा का अध्किर मिलना चाहिए।’’