कृष्णकांत का लेखः हिंदुस्तान जिंदाबाद! इस आपदा में लावारिसों का वारिस बना मुस्लिम समाज

कृष्णकांत

आपको तबलीगी जमात याद है? वही मरकज वाला कांड। कोरोना हिंदुस्तान आया तो नफरत की राष्ट्रीय फैक्ट्री ने तबलीगी जमात को पकड़ लिया। एक कार्यक्रम की गलती के बहाने गोदी मीडिया बताने लगा कि जैसे मुसलमान ही कोरोना फैला रहे हैं। जमात के कार्यक्रम के बहाने क्या क्या नहीं कहा गया। लेकिन उसी तबलीगी जमात ने अच्छे काम किए तो गोदी मीडिया खामोश रहा। अच्छे काम का प्रचार उस तरह नहीं किया गया।

आंध्र प्रदेश के तिरुपति में तबलीगी जमात के लोगों ने अगस्त 2020 को  ‘कोविड जॉइंट एक्शन कमिटी’ नाम का एक संगठन बनाया था। शुरुआत में ये संगठन सरकार से इजाजत लेकर सिर्फ मुसलमानों के शव दफनाने का काम करता था। बाद में जब उन्होंने देखा कि दूसरे धर्मों जैसे हिंदू और ईसाई के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है, तब उन्होंने उनका भी रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया। कई शव ऐसे भी होते हैं, जिनके साथ परिजन भी होते हैं और अंतिम संस्कार के लिए इनकी मदद मांगते हैं। ये संगठन अब तक करीब 500 शवों का अंतिम संस्कार किया है। इस संगठन में तिरुपति के रहने वाले 60 स्वयंसेवक शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर मैकेनिक, ऑटो ड्राइवर, होटल में काम करने वाले, टेलर या ठेले वाले और मजदूर हैं।

इस संगठन का नेतृत्व मोहम्मद गौस कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस महामारी के दौरान, जिनको अपने ही कंधा देने के लिए भी सामने नहीं आ रहे हैं, उन्हें कंधा देकर और उनके अंतिम संस्कार में हिस्सा लेकर अच्छा लग रहा है। हम इंसानियत की सेवा कर रहे हैं।

इनके पास हर दिन अस्पतालों से फोन आते हैं। जहां भी किसी शव को उनके करीबी लेने से मना कर देते हैं या शव लावारिस होते हैं, जिसे कोई पूछने वाला नहीं होता, इन्हें सूचना दी जाती है। संगठन के स्वयंसेवकों की टीम पहुंचती है और शव ले जाकर उनका अंतिम संस्कार करती है। लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए सरकार ने तिरुपति से करीब 25 किलोमीटर दूर मामंदूर के जंगलों में जगह दी है।

पूरे देश में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां कोरोना से मौत होने के बाद परिवार ही शव उठाने को तैयार नहीं होता। ऐसी परेशानी जहां जहां आई है, वहां मुसलमानों ने इंसानियत की लाज बचाई है। गाजियाबाद के मोदीनगर में ममता कंसल की मौत हुई तो शव को कंधा देने कोई हिंदू नहीं आया। कोरोना के डर से रिश्तेदार भी नहीं आए। ममता के पति अशोक भी कोरोना संक्रमित हैं। ऐसे में पड़ोसी मुसलमानों ने उनका साथ दिया। मुस्लिम संस्था के युवकों ने मिलकर सारा इंतजाम किया और हिंदू रीति रिवाज से महिला का अंतिम संस्कार करवाया।

मोदीनगर में ममता के अंतिम संस्कार में शामिल मुस्लिम युवकों की ये फोटो न्यूज ट्रैक वेबसाइट से ली है। ये बताने का मकसद ये है कि हमारी सरकार और हमारा कथित चौथा खंभा हमें झूठ परोसता है और हिंदुस्तान की जनता को आपस में बांटता है।

जब तबाही से बचने का इंतजाम करना था, तब ​’सिस्टम’ नफरत फैला रहा था। आज जब हम सब संकट में हैं तो वे लोग काम आ रहे हैं जिनके खिलाफ नफरत फैलाई गई थी। मुस्लिम समुदाय ने महामारी में उस नफरत के अभियान की धज्जियां उड़ा दी हैं। हिंदुस्तान जिंदाबाद!

(लेखक जाने माने पत्रकार एंव टिप्पणीकार हैं)