टिकैट के तंबू में लगी AC पर फब्तियां कसने वाले ‘एंकर्स’ को पत्रकार का जवाब ‘जितने में तुम्हारा दफ्तर है, उतने में उधर भैंस बंधी है।’

नई दिल्लीः सोशल मीडिया पर किसान नेता राकेश टिकैत की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में राकेश टिकैत किसान आंदोलन स्थल पर लगे तंबू में आराम कर रहे हैं, इस तंबू में एयरकंडीशन भी लगा हुआ है। जिसके कारण सरकार समर्थित एंकर्स और आई.टी सेल के लोगों ने राकेश टिकैत को ट्रोल करने की कोशिश की है। इन ट्रोल्स को युवा पत्रकार एंव कथाकार कृष्णकांत ने करारा जवाब दिया है। कृष्णकांत ने टिप्पणी करते हुए लिखा है कि जितने में तुम्हारे आका का दफ्तर है, उतने में उधर भैस बंधी रहती है।

उन्होंने लिखा कि सुनो बे ईएमआई छाप नौकरिहे! जितनी जमीन में तुम्हारा माचिस का डब्बा जैसा फ्लैट है, उतने में उधर गोबर डाला जाता है। जितने में तुम्हारे आका का दफ्तर है, उतने में उधर भैस बंधी रहती है। इसलिए हे मूर्ख शिरोमणि! तू इस बात पर हैरान न हो कि किसान नेता एसी में कैसे सो सकता है! हे गमला ब्रिगेड के गर्दभराज! एक सैलरीधारी नेता जब 10 लाख का सूट पहनता है तब तुम्हीं मारे खुशी के लोटने लगते हो। वही नेता जब कई करोड़ खर्च करके रैली करता है तब तुम मास्टरस्ट्रोक ढूंढ रहे होते हो। नोटबंदी, राफेल, पीएम केयर फंड और वेंटिलेटर जैसे घोटालों और संगठित लूट पर तुम्हारे मगज को लकवा मार जाता है।

उन्होंने लिखा कि  कॉरपोरेट का दानव किसानों की जमीन पर नजर गड़ाए बैठा है और डेढ़ लोगों की कॉरपोरेट पालतू सरकार किसानों की खेती और जमीन छीन कर कॉरपोरेट को सौंपना चाहती है। इसीलिए किसान सड़क पर हैं लेकिन 7 महीने में तुम्हें ये समझ मे नहीं आया। अब एसी में सोया हुआ किसान नेता की फ़ोटो देखकर तुम्हारे करेजा पे सांप लोट गया।

इस युवा पत्रकार ने लिखा कि  हे परसंतापी पुरुषों! सब सुख सुविधा तुमको और तुम्हारे फर्जी फकीरों को ही नहीं चाहिए। अपना परसंताप और कुढ़न त्याग दो! तुम इस बात से हैरान हो कि दर्जनों बीघे का मालिक किसान एसी में कैसे सो सकता है। कुछ दिन पहले तुम्हारी छाती पर सांप लोट रहा था कि किसान आंदोलन कर रहे हैं तो हलुवा पूड़ी क्यों खा रहे हैं!

उन्होंने लिखा कि हे अहमकों! किसानों और मजदूरों की साधारण जिंदगी ही देश की रीढ़ है। उन्हें भी सुखी रहने का हक है। छोटे और मझोले व्यापार बर्बाद करके ही जीडीपी माइनस में चली गई। किसानों के साथ भी वही हुआ तो मर जाओ दाने बिना, कौवे आंख निकाल ले जाएंगे। हे साक्षात पुच्छ-विषाणहीन पशु! अपनी आंख खोलो और मनुष्य को मनुष्य समझना शुरू करो, फिर तुम भी मनुष्य बन जाओगे।