रवीश का लेख: इन दिनों प्रधानमंत्री उधर देख रहे हैं, इसलिए इधर पर चुप हैं

इतना सब कुछ हो गया, प्रधानमंत्री की चुप्पी कुछ ऐसी है जैसे वे तो बारहवीं की परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हैं। पता ही नहीं था कि बाहर क्या चल रहा है। जब ऐसे मामलों में धर्म की राजनीति का भांडा फूटता है, वे सामने आकर नहीं बोलते। हमेशा चुप रहते हैं। चुनाव आएगा तो पूरी पार्टी एक समुदाय को ललकारने में इधर से उधर बयान देने लग जाती है। खुद प्रधानमंत्री के कई बयान हैं जिससे कोई भी बता देगा कि वे एक समुदाय को टारगेट करते हैं। 15 देशों ने एतराज ज़ाहिर किया, निंदा की और प्रधानमंत्री को अपनी पार्टी के प्रवक्ता हटाने पड़े। पूरी दुनिया में भारत की बदनामी हुई लेकिन इन दिनों प्रधानमंत्री विकास की योजनाओं को गंभीरता से गिनाने में लगे हैं ताकि लगे कि उन्हें तो इन सबसे मतलब नहीं है। वे तो उधर देख रहे थे, नहीं पता कि इधर क्या चल रहा है। विकास की योजनाओं का भी हाल देख लीजिए, इतना विकास हो गया है कि इतना लोग महंगाई और बेरोज़गारी के चक्र से ही निकल नहीं पा रहे।

दूसरा गोदी मीडिया और समुदाय के खिलाफ राजनीति में कोई अंतर नहीं आएगा। राजनीति का आधार ही है तभी तो ऐसी भाषा आठ साल से घर-घर पहुँचाई गई है। इनमें से कइयों से बीजेपी के बड़े नेता मिलते रहे हैं और बीजेपी के नेता भी वही भाषा बोलते रहे हैं। इसलिए गोदी मीडिया का डिबेट जारी रहेगा। ऐसे नए लोग आकर धर्म के मुद्दे पर ललकारेंगे। ये नहीं करेंगे तो और क्या करेंगे?

गोदी मीडिया और मौलाना

गोदी मीडिया में कुछ मौलाना ख़ुद से आते हैं या वे सत्ता की किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर आते हैं। ख़ुद को ख़राब तरीक़े से पेश करने के लिए ताकि दूसरे तरफ़ को यह कहने का मौक़ा मिले कि देखो कैसे बोलते हैं। सुनने वाले को लगे कि ‘ये लोग’ ऐसे होते हैं। ताकि ‘इनके’ के बारे में जो घृणा फैलाई गई है, वो लोगों की निगाह में सही लगे। कुछ मौलाना इस भूमिका को निभाने जाते हैं। हो सकता है इन्हें सत्ता का कोई गुप्त संरक्षण मिला हो या कोई और बात हो।

बाक़ी अगर नफ़रत को डिबेट से हटा देंगे तो गोदी डिबेट में बचेगा क्या। आप किसी एक शो को केवल उस दिन के शो की नज़र से मत देखिए, कई सारे शो को मिला कर देखिए। एक अकेला शो चुनेंगे तो हो सकता है कि किसी शो में ये पत्रकारिता की बात करने लगें और किसी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की। बाक़ी अब आप उस स्तर पर हैं, जहां से कुछ नहीं हो सकता। गोदी मीडिया ऐसे ही रहेगा और करोड़ों लोग देखने वाले वैसे ही रहेंगे।

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