रवीश का लेख: कश्मीर फाइल्स ने कश्मीरी पंडितों से उनका दर्द और इतिहास दोनों हड़प लिया है.

कश्मीरी पंडित केवल जम्मू के कैंप में ही नहीं रहते लेकिन वहाँ भी रहते हैं. देश भर में कश्मीरी पंडित रहते हैं. जम्मू के कैंप में लगता है कि बीबीसी की ही टीम गई है. यहाँ रहने वाले कश्मीरी पंडितों से कश्मीर फाइल्स के बहाने जो राजनीति हो रही है उस पर बातचीत की गई है.

वैसे आपके भीतर ज़हर इतना फैला दिया गया है कि पत्रकार राहुल पंडिता भी जब कोई बात कहते हैं तो उन्हें भी गाली पड़ती है. जबकि ख़ुद उनका परिवार भुक्तभोगी है और उनका घर हमेशा के लिए छूट गया. इससे पता चलता है कि कश्मीर फाइल्स ने कश्मीरी पंडितों से उनका दर्द और इतिहास दोनों हड़प लिया है. अब कोई कश्मीरी पंडित इससे अलग बातें कहेगा उसे भी देशद्रोही की क़तार में खड़ा कर दिया जाएगा.

कश्मीर और कश्मीर फाइल्स पर अशोक कुमार पांडेय का यह दूसरा वीडियो है. उस समय के राज्यपाल जगमोहन की भूमिका को लेकर बताया है. मूल बात यह है कि आप इन बातों को जानिए, ख़ुद भी थोड़ा पढ़िए. हर चीज़ को व्हाट्स एप फारवर्ड से जानना भी अपने आप में कामचोरी है.

कोई नहीं कह रहा कि कश्मीरी पंडितों के साथ ग़लत नहीं हुआ. देश हमेशा उनके साथ खड़ा रहा है. आपको भी खड़ा होना चाहिए लेकिन सोचिए आप आज क्यों जागे क्योंकि आप पढ़ने की कोशिश नहीं करेंगे.

क्या आप इतिहास पढ़ते हैं? साल भर में या पाँच साल में किसी भी विषय पर इतिहास की कितनी किताबें पढ़ते हैं. इस मुद्दे को लेकर अब नफ़रत फैलाने में मत लगिए बल्कि समझिए कि क्या हुआ और क्यों ख़ास तरह की जानकारी आपके बीच फैलाई जा रही है. अशोक कुमार पांडेय ट्विटर पर भी हैं. उनके ट्विटर हैंडल पर भी कई और चीजें हैं. उनके हैंडल का पता @Ashok_Kashmir है.

(लेखक जाने माने पत्रकार हैं यह लेख उनके फेसबुक पेज से लिया गया है)

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