रवीश कुमार का लेख: प्राकृतिक प्रकोप समाचार

मणिपुर में भू-स्खलन में टेरिटोरियल आर्मी के 52 जवान दब कर शहीद हो गए। 9 का अभी तक पता नहीं चला। 18 लोगों को जीवित बचा लिया गया।13 दिनों तक तलाश होती रही। पहाड़ी रास्तों से होकर रेल लाइन बिछाई जा रही थी।

गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश से भयंकर तबाही मची है। 24 घंटें में सूरत और नर्मदा इलाक़ों में 500 mm से ज्यादा बारिश हो गई। 10 और 11 जुलाई को भी कई ज़िलों में भरी 600 mm बारिश रिकॉर्ड की गयी थी जिस वजह से कई बड़ी नदियों में जल स्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बड़ा हो रहा है. एक तरह से 72 घंटों के भीतर 1100 mm बारिश हुई है। कम समय में इतनी अधिक वर्षा से बाढ़ की स्थिति पैदा हो ही जाती है।

तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मध्य महाराष्ट्र और कोंकण के इलाके में भी बाढ़ के हालात हैं। महाराष्ट्र में अभी तक 84 लोगों की मौत हो गई है। नागपुर के सावनेर में एक कार नाले में बह गई। कार में छह लोग सवार थे।नाशिक में गोदावरी नदी शहर के बीचों बीच बह रही है।नदी के किनारे बसे लोगों को हटाया जा रहा है। गढ़ चिरौली में तीन दिनों के लिए स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

बारिश ने तबाही का इलाका बदल लिया है। कम समय में अधिक बारिश से कब कौन शहर पानी से भर जाए पता नहीं। इसके बाद भी जलवायु परिवर्तन को लेकर केवल भाषण है। आज तक कहीं भी ऐसे उपाय नहीं हुए जिसे देख कर लगे कि वाकई कोशिश हुई और संरक्षण हुआ है।वृक्षारोपण का नाटक होता है, जिसे आधी अधूरी समझ रखने वाली जनता पर्याप्त उपाय मान लेती है। ख़ुशी हो जाती है। बाकी जनता बाढ़ का वीडियो वायरल कराने में लगी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.