रवीश का लेख: भारतीयता और धर्म की आड़ में अधर्म और अ-भारतीयता का तमाशा खेला जा रहा है…

यह देश एक सुंदर बनता हुआ देश था, बहुत सी कमियाँ थीं जिन्हें मिलकर हल करना था, उन रास्तों पर बहस करनी थी, अच्छे स्कूल और कालेज की कल्पना साकार करनी थी लेकिन भारतीयता और धर्म की आड़ में अधर्म और अ-भारतीयता का तमाशा खेला जा रहा है। आए दिन किसी ग़रीब की रोज़ी पर धर्म के नाम पर हमला हो रहा है। अगर लगता है कि इससे समाज में तरक़्क़ी आएगी तो आप गफ़लत में हैं। आप अपने भीतर की हिंसा को पाल पोस रहे हैं, एक दिन वह हिंसा आपको ही चपेट में ले लेगी। इन सब चीज़ों की एक सीमा होती है, जितना कहना था, जितना बोलना था, बोल ही लिए लेकिन धर्म के नाम पर कभी फल वाले का बहिष्कार हो रहा है तो कभी फूल वाले का। कभी तो ठहर जाइये। सोचिए कि जो हो रहा है क्या उसके बिना सत्ता प्राप्त नहीं की जा सकती है, क्या यही एक रास्ता बचा है?

आप लगे रहिए धरना प्रदर्शन में

भारत की यूनिवर्सिटी की हालत के बारे में छात्र जानता है। हर जगह कुछ अच्छे शिक्षकों के नाम पर यूनिवर्सिटी चल रही है। जिन्हें ये बात समझ आ गई है वो अपने बच्चों को भारत से बाहर भेज रहे हैं बाक़ी माहौल के लिए सोशल मीडिया पर भारत की महानता के गुण गाते रहते हैं और उन्हें देख कर यहाँ फँसे छात्र भी गाते रहते हैं।

UGC को साफ़ करना चाहिए कि नए पाठ्यक्रम के लिए जो एक्सपर्ट कमेटी बनी थी उसके सदस्यों के नाम क्या हैं, इन सदस्यों ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन और यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना की साइट से सामग्री उठाकर भारत के लिए बनने वाले पाठ्यक्रम के ड्राफ़्ट में क्यों डाली? क्या कॉपी पेस्ट से भारत को विश्व गुरु बनाया जा रहा है? डेमोक्रेटिक टीचर्स फ़्रंट के इन आरोपों का जवाब तो बनता ही है। बाक़ी आप दौड़ते रहिए और धरना देते रहिए। उसी में लगे रहिए।

मगध यूनिवर्सिटी

कल किसी ने बिहार से मैसेज लिखा, पहली दो चार पंक्तियाँ ऐसी थीं जैसे वाद-विवाद प्रतियोगिता के लिए लिखी गई हैं।मैं ज्ञान की धरती नालंदा से हूँ। अतीत के गौरव को इस तरह से लोग जीने लग गए हैं कि जैसे हमें पता ही नहीं है कि उस बिहार में थर्ड क्लास यूनिवर्सिटी की भरमार है। और ‘ ज्ञान की धरती नालंदा’का ढोल बजाने के बाद जनाब किसी परीक्षा या यूनिवर्सिटी की ही बात कर रहे थे। मगध यूनिवर्सिटी के छात्र क्या नहीं जानते कि उनके साथ क्या हो रहा है लेकिन बोलते चलें कि हमें मगध नाम की हर चीज पर गर्व है तो कोई बात हुई।

बहरहाल नालंदा नालंदा करने वालों को पता होना चाहिए कि नालंदा का गौरव बहाल करने के लिए नई यूनिवर्सिटी बनी है। उसका भी नाम लिया कीजिए। बताया कीजिए कि क्या हाल है। कैसी पढ़ाई है, पढ़ाने वाले की योग्यता कैसी है, इस लिंक में एम ए का कोर्स है। विश्व साहित्य, इतिहास के साथ साथ हिन्दू सनातन भी एक कोर्स है। दो साल का एम ए है। यह कोई साधारण विषय तो है नहीं। तो क्या पढ़ाया जा रहा है? पढ़ाने वाला कैसा है यह सब भी बताइये। एडमिशन लेकर पढ़ भी आइये। बिहार के लोगों को तो नालंदा यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के लिए होड़ मची देनी चाहिए। सामने गौरव है और गौरव है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ़ भाग रहा है और जा कर फँस जाता है मगध यूनिवर्सिटी में।

(लेखक जाने माने पत्रकार हैं, यह लेख उनके फेसबुक पेज से लिय गया है)

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