‘ये वक़्त मुसलमानों के साथ डटकर खड़े होने का है!’

विक्रम सिंह चौहान

इस वक़्त आप बहाने बना रहे हैं मतलब आप संघियों के साथ है। आपने हमेशा बहाना बनाया है तब भी जब पिछले 8 साल में 40 से अधिक कश्मीरी नागरिकों की मौत फौज की शॉटगन पैलेट्स/जहरीले गैस से हुई है। मरने वालों में नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। आपने बच्चे का जिस्म हजार छेद से भरा देखा पर आपका दिल नहीं पसीजा क्योंकि मरने वाला कोई शर्मा, सिंह,अग्रवाल आदि आदि (बुरा लग रहा है तो लगाइए) नहीं था।

मॉब लिंचिंग में भी नाबालिग से लेकर 70 साल के बूढ़े की मौत हो गई,आपने विरोध नहीँ किया उल्टे इस सरकार को फिर से सत्ता में ले आये। दंगो में सैकड़ों मुस्लिम मारे गए,उन्हीं के बच्चे जेल गए,यूएपीए में कई साल से जेल से सड़ाये जा रहे हैं उन्हीं के युवा। आप मुसलमानों को शांति का मार्ग दिखाते जरूर है पर ये शांति का मार्ग तब क्यों नहीं दिखाते जब आपके कौम के लोग उन लोगो को बुरी तरह मारते हैं, खून से सने मुस्लिम का जिस्म देखकर आपके आंसू क्यों नहीं गिरते? क्या सफेद टोपी देखकर आपकी आंखें आंसू निकालने से इंकार कर देता है?

कोई पत्थर उछालता है तो आप क्या करते हैं धड़ाधड़ गोलियां! ये नहीँ देखते कि कोई बच्चा हो सकता है जिसके सीने में ये गोली धंस जाए जिसके सिर से ये गोली आरपार निकल जाए। आप कब उनके घर तक गए बात करने? आप कब उनको बुलाये अपने साथ बैठकर खाना खाने? आप कब उनको न्याय मांगे तब दिए? आपने कब कहा कि, आप हमारे हैं आपको देशभक्ति का सबूत कोई मांगे तो हमें बताइये। आपने ये सब नहीं किया। आपने उनका घर गिराया बुलडोजर से अदालत के फैसले से पहले।

आप मुस्लिमों के खिलाफ फारवर्ड हो रहे करोड़ों नफरती व्हाट्सएप देख चुप रहते हैं। या आप अपने नजदीकी लोगों को ये फारवर्ड कर कहते हैं “ये नहीं सुधरेंगे।’ बुलडोजर बाबा सही कर रहे। नफरती महिला की गिरफ्तारी को लेकर भी आप अगर मगर कर रहे हैं। आप सोशल मीडिया में कितना भी डींगें मार लें सच तो यही है लाशें किसी घर की गिर रही है तो वह मुस्लिम के घर की है। उनके ही बच्चे मारे जा रहे हैं। अगर उनके मन में सत्ता को लेकर क्रोध है तो आप उनके घर गुलाब का फूल लेकर जाइये। बोलिये भाई हमारा जिस्म दो है पर जान एक है। हम इस सरकार के खिलाफ आपके साथ खड़े हैं। आपको गोली चलेगी तो सीना हमारा सामने होगा!

(लेखक सोशल एक्टविस्ट एंव पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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