UNSC में क्या है वीटो पावर और रूस को कैसे मिल रही है मदद?

यूक्रेन पर आक्रमण के चलते कई देशों द्वारा रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाया गया. लेकिन रूस ने एक बार फिर से अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर इसे रोक दिया. रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया है जिसमें मॉस्को से यूक्रेन पर हमला रोकने और सभी सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की गई.

हालांकि ये पहले से तय था कि ऐसा ही होगा क्योंकि रूस के पास वीटो पावर है. अमेरिका और उसके समर्थक जानते थे कि यह प्रस्ताव विफल हो जाएगा लेकिन उन्होंने दलील दी कि इससे रूस अंतरराष्ट्रीय रूप से अलग-थलग पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत (रूस का) पड़ा. चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य हैं. इनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन हैं. इसके साथ ही हर दो साल के लिए 10 अस्थायी मेंबर को भी चुना जाता है. किसी मुद्दे पर फैसला लेने के लिए पांचों स्थायी सदस्यों की सहमति जरुरी होती है. अगर कोई एक सदस्य किसी मसले पर विरोध करता है तो फैसला नहीं होता है. और उस सदस्य के विरोध को ही वीटो कहते हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों में से कोई भी किसी प्रस्ताव के खिलाफ अपना वोट डालता है तो प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, चीन, फ्रांस और सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देश हैं. इन पांचों देशों के पास वीटो पावर मौजूद है.

1992 के बाद से, रूस वीटो का सबसे अधिक बार उपयोग करने वाला देश रहा है. इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन का स्थान आता है. फरवरी 2022 तक, रूस ने 118 बार अपने वीटो का इस्तेमाल किया है. वहीं अमेरिका 82 बार, यूके 29 बार, फ्रांस 16 बार और चीन 17 बार इसका यूज कर चुका है.

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