रज़िया सुल्ताना ने रचा इतिहास, बिहार पुलिस में DSP बनने वाली पहली मुस्लिम महिला की सफलता की कहानी

पटनाः बिहार के गोपालगंज जनपद की रज़िया सुल्ताना ने इतिहास रच दिया है। रज़िया बिहार पुलिस में डायरेक्ट पुलिस उपाधिक्षक (DSP) बनने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने यह उपलब्धि चार साल के लंबे इंतजार के बाद हाल ही जारी बिहार लोक संघ आयोग (बीपीएससी) के नतीजों के बाद हासिल की है। बिहार पुलिस में डीएसपी बनने वालीं पहली मुस्लिम लड़की रज़िया सुल्ताना मूलरूप से गोपालगंज जिले के हथुआ के रतनचक की रहने वाली हैं। इनके पिता एमडी असलम अंसारी बोकारो स्टील प्लांट में स्टेनोग्राफर पद पर नौकरी करते थे। उनका साल 2016 में इंतेकाल हो चुका है। फिलहाल पूरा परिवार बोकारो में ही रह रहा है।

चाचा ने कहा भतीजी पर गर्व

न्यूज़ पोर्टल वन इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ रज़िया के चाचा डॉ. ए.आर अंसारी मशरक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा प्रभारी थे। पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. ए.आर अंसारी ने कहा कि भतीजी की कामयाबी पर गर्व है। रज़िया सात भाई बहनों में सबसे छोटी है। उनका इकलौता भाई एमबीए करके झांसी में निजी कंपनी में जॉब कर रहा है।

रज़िया ने बताया कि वे वर्तमान में बिजली विभाग में सहायक ​अभियंता पद पर कार्यरत हैं। नौकरी के साथ ही बीपीएससी की तैयारी की थी, मगर समस्या यह आई कि पटना में बीपीएससी की कोचिंग हिंदी में होती है, जिसमें वे असहज महसूस करतीं थी। ऐसे में घर पर खुद ही अंग्रेजी माध्यम से तैयारी की। पहले प्रयास में सफल हो गईं।

40 DSP में मात्र चार मस्लिम

कोचिंग जगत से जुड़े डॉ. एम रहमान बताते हैं कि 64वीं BPSC के 1454 में से 98 मुस्लिम उम्मीदवार सफल रहे हैं। जिसमें 40 अभ्यर्थी डीएसपी बने हैं। लेकिन इन 40 डीएसपी में मात्र चार ही मुस्लिम हैं। डायरेक्टर बिहार पुलिस में डीएसपी बनने वालीं रज़िया सुल्तान बिहार की पहली मुस्लिम महिला बन गई हैं। जानकारी के लिये बता दें कि बिहार पुलिस में डीएसपी बनी पहली मुस्लिम महिला रज़िया सुल्ताना का राजस्थान से संबंध रहा है, उन्होंने स्नातक की डिग्री राजस्थान से हासिल की है। रज़िया ने साल 2011 में बोकारो से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिसके बाद रज़िया राजस्थान आ गई थीं, और राजस्थान के जोधपुर से उन्होंने इलैक्ट्रिक इंजीनियरिंग में स्नातक की।

मुझे तो डीएसपी का मतलब तक पता नहीं

एक तरफ जहां पूरे बिहार और अन्य राज्यों में रज़िया के डीएसपी बनने की सराहना हो रही है, वहीं रज़िया सुल्ताना की मां गुलाबुन निशा बताती हैं कि उन्हें तो डीएसपी का मतलब भी मालूम नहीं, रज़िया की मां बतातीं हैं कि रज़िया का जन्म 1994 में हुआ था। वह बचपन से ही होनहार रही है। उनकी बेटी को डीएसपी बनने के बाद मुबारकबाद देने वालों का तांता लगा हुआ है। मुझे तो डीएसपी की पोस्ट के बारे में पूरी जानकारी तक नहीं है, मगर बेटी ने पुलिस अफसर बनकर पूरे परिवार का नाम रोशन किया है।

टूटते मिथक लिखी जा रही नई इबारत

अक्सर मुसलमानों की ओर से कुंठाग्रस्त रहने वाले मुसलमानों पर तानाकशी करते हैं कि मुस्लिम परिवारों में बेटियों को पढ़ने लिखने और आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर नहीं मिलते। उन्हें बुर्के में ‘क़ैद’ करके घर तक ही सीमित रहना पड़ता है। लेकिन रज़िया जैसी होनहार बेटियों ने इस मिथक को तोड़ दिया है। रज़िया कहतीं हैं कि वे उनके परिवार की सोच आधुनिक है, बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं समझा जाता है। बेटियों को पढ़ने लिखने का भरपूर मौक़ा मिलता है। परिजनों ने मुझे पढ़ने के लिए बोकारो से राजस्थान के जोधपुर भेज दिया था।