कर्नाटक में ‘हलाल’ बना ध्रुवीकरण का नया मुद्दा

बेंगलुरू: कर्नाटक में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होना है। चुनाव से पहले कर्नाटक लगातार मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। सुर्खियों में रहने का कारण वे घटनाएं हैं जो बीते कुछ महीनों से कर्नाटक में घट रही हैं। अभी हिजाब मुद्दा पूरी तरह शांत नहीं हो पाया था, किराज्य भर में ‘हलाल’ विवाद छिड़ गया है।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई द्वारा सभी पुलिस अधीक्षकों और जिला आयुक्तों को दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए रविवार को होसा तदुकु (उगादी उत्सव के बाद जहां लोग मांस और शराब पर दावत देते हैं) के उत्सव के मद्देनजर राज्य में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

हलाल मांस के बहिष्कार के लिए हिंदू संगठनों द्वारा अभियान चलाने और सत्तारूढ़ भाजपा के मंत्रियों के खुले तौर पर इसका समर्थन करने से स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। हिंदू संगठन बहुसंख्यक हिंदुओं के बीच केवल ‘झटका’ मांस खरीदने के लिए अभियान चला रहे हैं, जिससे यह कर्नाटक में मांस का मुद्दा अब हलाल कट बनाम झटका कट मांस बन गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने हलाल विवाद को सत्तारूढ़ भाजपा के आगामी चुनावों में 150 सीटें हासिल करने का रोडमैप बताया है। वहीं मशहूर उद्यमी किरण मजूमदार शॉ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि, यदि सांप्रदायिक बहिष्कार आईटी-बीटी उद्योग को प्रभावित करता है, तो भारत अपना वैश्विक नेतृत्व खो देगा।

दक्षिणपंथी चक्रवर्ती सुलीबेले ने का कहना है यह अभियान आवश्यक है क्योंकि मुसलमान हर उद्योग में आर्थिक बहिष्कार ला रहे हैं। “हमें वहीं मारना होता है जहां दर्द होता है। मुसलमानों को अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए और हिंदुओं के साथ मिलकर रहना चाहिए जैसे उन्होंने 50 या 100 साल पहले किया था।

हलाल मीट बैन का प्रचार करने के लिए हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले अधिवक्ताओं के एक समूह का नेतृत्व करने वाले पूर्व अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एपी रंगनाथ ने कहा कि राज्य में जो हो रहा है वह अच्छा नहीं है। “कर्नाटक एक शांतिपूर्ण राज्य था। अब अगर विभाजनकारी एजेंडे को अंजाम देने वाले इन चंद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो सब कुछ शांत हो जाएगा।

 रंगनाथ कहत हैं कि ये गतिविधियाँ बहुत कम लोगों द्वारा की जा रही हैं, 3 प्रतिशत से भी कम। अगर इन 5 से 6 नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है, तो नफरत का अभियान बंद हो जाएगा। हम चरण दर चरण आगे बढ़ रहे हैं। हम सरकार पर दबाव बनाना जारी रखेंगे। कोई बल नहीं होना चाहिए। हलाल मांस या अन्यथा खाने के लिए इसे व्यक्ति पर छोड़ दिया जाना चाहिए। अगर सरकार कार्रवाई शुरू नहीं करती है, तो अदालतें हैं, हम सरकार के खिलाफ कानूनी रूप से आगे बढ़ेंगे।”

वक्फ के मुजराई मंत्री शशिकला जोले ने कहा कि हलाल मीट के मुद्दे पर मुख्यमंत्री द्वारा फैसला लिया जाएगा. “हलाल कट की तरह, झटका कट भी होना चाहिए। हम उन हिंदू संगठनों के साथ हैं जो झटका मीट पर जोर दे रहे हैं। हलाल कट में जानवर का गला काटा जाता है और खून निकलने के बाद मांस का उपयोग किया जाता है। यह इस्लामी परंपरा के अनुसार किया जा रहा है। झटका में जानवर की गर्दन की पर तेज़ी से अटैक किया जाता है यह पारंपरिक हिंदू तरीका है। इससे जानवर को एक ही बार में मार दिया जाता है और मांस तैयार किया जाता है।

हिजाब पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में मुस्लिम व्यापारियों द्वारा बंद किए जाने के बाद पूरा विवाद खड़ा हुआ है। बता दें कि अदालत ने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था और यह भी कहा था कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं है।

मुस्लिम दुकानदारों की हड़ताल के जवाब में, हिंदू संगठनों ने मंदिर परिसर और धार्मिक मेलों के अंदर मुस्लिम व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रचार करना शुरू कर दिया। इसके तुरंत बाद, हिंदू कार्यकर्ताओं द्वारा हलाल मांस पर प्रतिबंध लगाने के अभियान को भी गति मिली।

सत्तारूढ़ भाजपा ने सभी मांस विक्रेताओं को जानवरों को प्रताड़ित नहीं करने और एक जानवर काटते समय अनिवार्य रूप से ‘एक नई’ प्रक्रिया का पालन करने के लिए एक परिपत्र जारी किया। इसके अनुसार जानवर को वध करने से पहले बेहोश कर दिया जाता है। इसे लेकर राज्य में विवाद पैदा होने की संभावना है क्योंकि मुसलमानों को उनके धर्म द्वारा हलाल प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किए गए मांस का उपयोग करने के लिए अनिवार्य किया गया है।

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